आदित्यनाथ से मिले शिवपाल यादव
BJP ज्वाइन करने के सवाल पर अपर्णा ने कहा था- वक्त आने पर जवाब दूंगी
- जब अपर्णा से पूछा गया कि क्या वो बीजेपी ज्वाइन कर रही हैं, तो उन्होंने कहा कि वक्त आने पर जवाब दूंगी।
- बता दें कि योगी के सीएम बनने के बाद 24 मार्च को भी अपर्णा और प्रतीक उनसे मिलने वीवीआईपी गेस्ट पहुंचे थे। सूत्रों ने इसे फॉर्मल मीटिंग बताया था।
- 15 सितंबर 2015 को भी अपर्णा ने गोरखपुर में आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। उस वक्त वो पॉलिटिक्स में ज्यादा एक्टिव नहीं थीं।
- मुलाकात के दौरान अपर्णा ने महंत अवैद्यनाथ के निधन पर शोक जताया था।
- बता दें कि योगी के सीएम बनने के बाद 24 मार्च को भी अपर्णा और प्रतीक उनसे मिलने वीवीआईपी गेस्ट पहुंचे थे। सूत्रों ने इसे फॉर्मल मीटिंग बताया था।
- 15 सितंबर 2015 को भी अपर्णा ने गोरखपुर में आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। उस वक्त वो पॉलिटिक्स में ज्यादा एक्टिव नहीं थीं।
- मुलाकात के दौरान अपर्णा ने महंत अवैद्यनाथ के निधन पर शोक जताया था।
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31 मार्च को योगी से मिले थे अपर्णा-प्रतीक
- योगी आदित्यनाथ 31 मार्च को लखनऊ के कान्हा उपवन पहुंचे थे, जहां उन्होंने गायों के बीच वक्त बिताया और उनकी देख-रेख के बारे में जाना था।
- इस दौरान मुलायम के छोटे बेटे प्रतीक यादव भी पत्नी अपर्णा यादव के साथ वहां मौजूद थे।
- योगी आदित्यनाथ 31 मार्च को लखनऊ के कान्हा उपवन पहुंचे थे, जहां उन्होंने गायों के बीच वक्त बिताया और उनकी देख-रेख के बारे में जाना था।
- इस दौरान मुलायम के छोटे बेटे प्रतीक यादव भी पत्नी अपर्णा यादव के साथ वहां मौजूद थे।
- अपर्णा ने बताया था कि जब उन्हें पता चला कि योगी को गाय-भैंसों से खास लगाव है तो उन्होंने खुद सीएम को कान्हा उपवन आने के लिए इनवाइट किया था।
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अपना और बेटे का करियर बीजेपी में देख रहे हैं शिवपाल
- सभी जानते हैं कि जब तक सपा अखिलेश यादव के हाथ में है, तब तक शिवपाल यादव के उभरने की संभावनाएं कम हैं। इसकी वजह ये है कि जरूरी मौकों पर मुलायम भी उनका साथ छोड़ते नजर आए हैं। वहीं, बसपा में भी उनका कोई स्कोप नहीं है।
- एक्सपर्ट के मुताबिक, शिवपाल के पास लोकदल चीफ बनने का ऑफर तो है, लेकिन यूपी में पार्टी का वजूद खत्म है।
- वहीं, बीजेपी के 2019 चुनाव जीतने के प्लान में पार्टी को मुलायम के गढ़ में एक ऐसा यादव नेता चाहिए, जो पूरी यादव कम्युनिटी को तो नहीं, लेकिन बड़ी संख्या में उनके वोट बटोर सके। इस लिहाज से शिवपाल के लिए बीजेपी के पास सॉफ्ट कार्नर है।
- साथ ही शिवपाल को अपने बेटे आदित्य का भविष्य भी सिक्योर करना है। इस लिहाज से भी उनके लिए बीजेपी का ऑप्शन उनके लिए बेहतर साबित होगा।
- सभी जानते हैं कि जब तक सपा अखिलेश यादव के हाथ में है, तब तक शिवपाल यादव के उभरने की संभावनाएं कम हैं। इसकी वजह ये है कि जरूरी मौकों पर मुलायम भी उनका साथ छोड़ते नजर आए हैं। वहीं, बसपा में भी उनका कोई स्कोप नहीं है।
- एक्सपर्ट के मुताबिक, शिवपाल के पास लोकदल चीफ बनने का ऑफर तो है, लेकिन यूपी में पार्टी का वजूद खत्म है।
- वहीं, बीजेपी के 2019 चुनाव जीतने के प्लान में पार्टी को मुलायम के गढ़ में एक ऐसा यादव नेता चाहिए, जो पूरी यादव कम्युनिटी को तो नहीं, लेकिन बड़ी संख्या में उनके वोट बटोर सके। इस लिहाज से शिवपाल के लिए बीजेपी के पास सॉफ्ट कार्नर है।
- साथ ही शिवपाल को अपने बेटे आदित्य का भविष्य भी सिक्योर करना है। इस लिहाज से भी उनके लिए बीजेपी का ऑप्शन उनके लिए बेहतर साबित होगा।
