अब प्रदेश के साढ़े 16 हजार करोड़पति आयकर के निशाने पर हिन्दी दैनिक जागरण 2017
लखनऊ (जेएनएन)। नया वित्तीय वर्ष शुरू
होने के साथ ही प्रदेश के करीब साढ़े 16 हजार करोड़पति आयकर विभाग के निशाने पर आ गए हैं। ये वे लोग हैं, जिन्होंने नोटबंदी के बाद बैंक में करोड़ों रुपये के हजार व पांच सौ रुपये के नोट तो जमा कराए, लेकिन इन्हें अपनी अघोषित आय नहीं माना। आयकर विभाग ने उनसे प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में शामिल होने की अपील की और 31 मार्च तक उनका इंतजार भी किया, लेकिन वे नहीं आए तो अब आयकर की टीम उनके यहां धमकने की योजना बना रही है।
जनवरी में आयकर ने ऐसे सभी करोड़पति जमाकर्ताओं को ई-मेल भेज कर जमा हुई रकम का स्रोत पूछा था। आयकर अधिकारियों के मुताबिक बड़ी संख्या में ई-मेल से लोगों के जवाब तो मिले, लेकिन स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं था। इसी के बाद आयकर विभाग ने करोड़ों रुपये जमा करने वालों पर दबाव बढ़ा दिया था। कुछ जगहों पर छापे भी डाले, जिसके प्रभाव से काफी लोग खुद अपनी अघोषित आय बताने के लिए आगे आए, लेकिन प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का लक्ष्य फिर भी पूरा नहीं हो पाया।
आयकर के उपनिदेशक जांच जयनाथ वर्मा बताते हैं कि 31 मार्च तक खुद आने का मौका देने के बाद अब सोमवार से कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसमें सर्च, सर्वे और नोटिस भेज कर तलब करने जैसे सभी एक्शन लिए जाएंगे। वर्मा के मुताबिक लोग खुद अपनी अघोषित आय बताते तो प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत उन्हें 50 फीसद टैक्स देना पड़ता, जबकि अब होने वाली कार्रवाई में 107 फीसद तक की अदायगी करनी पड़ सकती है। आयकर विभाग इसलिए भी अब तेज कार्रवाई करने के दबाव में है, क्योंकि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के लिए प्रदेश को जो 2750 करोड़ रुपये का लक्ष्य दिया था, विभाग उससे काफी पीछे रह गया।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत पंजीकरण करा के अघोषित आय बताने वालों का ब्योरा अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन अधिकारियों का अनुमान है कि करीब 500 लोगों ने योजना के तहत एक हजार करोड़ रुपये से भी कम की अघोषित आय की जानकारी दी है। हालांकि आयकर विभाग नोटबंदी के करोड़पतियों से पहले भी संक्षिप्त पूछताछ कर चुका है। नोटबंदी के बाद नवंबर व दिसंबर में बैंकों में एक करोड़ रुपये से अधिक रकम जमा होने के सभी मामलों की सूचना आयकर के पास रियल टाइम में पहुंची थी।
